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Platform Ticket Alert 2025 – दिल्ली रेलवे स्टेशन पर क्यों लगी रोक?
Platform Ticket Alert 2025 के तहत दिल्ली रेलवे स्टेशन पर यात्रियों के लिए प्लेटफॉर्म टिकट की बिक्री को अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। यह कदम अचानक नहीं बल्कि सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है। हाल के दिनों में त्योहारों के दौरान दिल्ली जंक्शन, नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन स्टेशन पर यात्रियों की संख्या रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ गई थी।
रेलवे प्रशासन के अनुसार, स्टेशन परिसर में अत्यधिक भीड़ न केवल यात्रियों की सुरक्षा को खतरे में डालती है, बल्कि ट्रेन संचालन में भी बाधा उत्पन्न करती है। इसलिए, Indian Railways ने यह फैसला लिया कि जब तक यात्रियों की भीड़ नियंत्रित नहीं होती, तब तक प्लेटफॉर्म टिकट की बिक्री बंद रहेगी।
यह कदम खासतौर पर उन लोगों के लिए लिया गया है जो सिर्फ अपने परिजनों को छोड़ने या रिसीव करने के लिए स्टेशन पहुंचते हैं। इस रोक से भीड़ में उल्लेखनीय कमी आएगी और सुरक्षा बलों को बेहतर तरीके से निगरानी करने में मदद मिलेगी।
रेलवे ने यह फैसला कब और क्यों लिया?
Platform Ticket Alert 2025 का निर्णय जनवरी 2025 के अंतिम सप्ताह में लिया गया और इसे फरवरी की शुरुआत से लागू कर दिया गया। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यह निर्णय त्योहार सीजन, सर्दियों की छुट्टियों और बढ़ते ट्रैवल ट्रेंड को ध्यान में रखकर लिया गया है।
पिछले कुछ महीनों में दिल्ली समेत उत्तर भारत के बड़े स्टेशनों पर यात्रियों की संख्या लगभग 30% तक बढ़ी है। ऐसे में प्लेटफॉर्म पर गैर-यात्रियों का प्रवेश न केवल सुरक्षा जोखिम बढ़ा रहा था, बल्कि ट्रेनों की समय-सारणी पर भी असर डाल रहा था।
रेलवे ने इस नीति को लागू करते समय सुरक्षा एजेंसियों से परामर्श लिया और यह निर्णय अस्थायी तौर पर प्रभावी किया गया है। हालांकि, अगर यह कदम सफल साबित होता है, तो इसे अन्य मेट्रो शहरों — जैसे मुंबई, लखनऊ और चेन्नई — में भी लागू किया जा सकता है।
किन यात्रियों पर इसका सीधा असर पड़ा है?
इस Platform Ticket Alert 2025 के कारण सबसे अधिक असर उन यात्रियों पर पड़ा है जो अपने परिवार या दोस्तों को छोड़ने या रिसीव करने स्टेशन आते हैं। खासकर बुजुर्ग और महिला यात्रियों को इस फैसले से कठिनाई हो रही है, क्योंकि अब वे अपने परिजनों को प्लेटफॉर्म तक छोड़ नहीं पा रहे हैं।
इसके अलावा, ट्रेनों के आगमन और प्रस्थान के समय पर होने वाली भीड़ में भी बदलाव देखा गया है। पहले जहां लोग प्लेटफॉर्म टिकट लेकर अंदर आते थे, अब उन्हें मुख्य गेट पर ही विदा करना पड़ता है। हालांकि, रेलवे ने यात्रियों की सुविधा के लिए प्रवेश द्वार के पास अस्थायी प्रतीक्षा क्षेत्र (Temporary Waiting Zone) बनाने की योजना शुरू की है।
रेलवे प्रशासन का कहना है कि यह निर्णय यात्रियों की सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण को प्राथमिकता देने के लिए है, और भविष्य में स्थिति सामान्य होने पर प्लेटफॉर्म टिकट बिक्री फिर से शुरू की जा सकती है।
सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के लिए रेलवे की नई नीति
Platform Ticket Alert 2025 के लागू होने के साथ ही भारतीय रेलवे ने यात्रियों की सुरक्षा और स्टेशन प्रबंधन को लेकर एक नई नीति शुरू की है। इस नीति का मुख्य उद्देश्य है — रेलवे प्लेटफॉर्म पर अनावश्यक भीड़ को कम करना और सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सशक्त बनाना।
दिल्ली रेलवे स्टेशन जैसे भीड़भाड़ वाले स्थानों पर, प्रतिदिन लाखों की संख्या में यात्री और उनके परिजन आते-जाते हैं। ऐसे में प्लेटफॉर्म पर अतिरिक्त लोगों की मौजूदगी न केवल सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बनती है, बल्कि किसी आपात स्थिति में राहत कार्य को भी कठिन बना देती है।
रेलवे ने इस नई नीति के तहत न केवल प्लेटफॉर्म टिकट बिक्री पर रोक लगाई है, बल्कि स्टेशन की निगरानी को और अधिक तकनीकी बनाया है — जिसमें AI-आधारित CCTV सिस्टम, भीड़-नियंत्रण बैरियर्स, और तैनात सुरक्षा कर्मियों की संख्या में वृद्धि जैसे कदम शामिल हैं।
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त्योहार सीजन और बढ़ती भीड़ पर नजर
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, Platform Ticket Alert 2025 को लागू करने के पीछे एक बड़ा कारण त्योहार सीजन में बढ़ती यात्रियों की भीड़ है।
दीवाली, छठ, क्रिसमस और नए साल के समय दिल्ली, लखनऊ, वाराणसी, और पटना जैसे स्टेशनों पर यात्रियों की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में दोगुनी हो जाती है।
ऐसे समय में, स्टेशन परिसर में न केवल यात्रियों बल्कि उनके साथ आने वाले परिजनों की भी भीड़ बढ़ जाती है, जिससे प्लेटफॉर्म पर अव्यवस्था फैलने लगती है।
इस भीड़ के कारण सुरक्षा एजेंसियों के लिए बैगेज जांच, मेटल डिटेक्शन और निगरानी कार्य कठिन हो जाता है।
इसी कारण रेलवे ने निर्णय लिया कि त्योहारों के मौसम में प्लेटफॉर्म टिकट पर रोक लगाकर केवल वास्तविक यात्रियों को ही स्टेशन परिसर में प्रवेश दिया जाएगा। इससे सुरक्षा जांच तेज, भीड़ नियंत्रित, और ट्रेन संचालन सुचारू बना रहेगा।
यह कदम सुरक्षा और सुविधा दोनों दृष्टि से एक संतुलित समाधान साबित हो रहा है, क्योंकि इससे यात्रियों की यात्रा का अनुभव अधिक सुरक्षित बन गया है।
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स्टेशन प्रबंधन और जांच प्रक्रिया में बदलाव
Platform Ticket Alert 2025 लागू होने के बाद रेलवे ने अपने स्टेशन प्रबंधन सिस्टम में कई नए बदलाव किए हैं।
अब हर प्रमुख रेलवे स्टेशन पर “Passenger Flow Monitoring System” की व्यवस्था की जा रही है, जो वास्तविक समय में यात्रियों की संख्या का डेटा एकत्र करता है। इससे सुरक्षा एजेंसियों को तुरंत पता चल जाता है कि स्टेशन में कितनी भीड़ है और किस क्षेत्र में नियंत्रण की आवश्यकता है।
इसके अलावा, रेलवे ने मेटल डिटेक्टर गेट्स, फेस रिकग्निशन कैमरा, और QR आधारित प्रवेश प्रणाली को भी शुरू करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। इन तकनीकों से यात्रियों की पहचान और टिकट सत्यापन तेज़ी से हो सकेगा, जिससे बिना टिकट या संदिग्ध व्यक्तियों की एंट्री रोकी जा सकेगी।
स्टेशन के अंदर भीड़ कम होने के बाद अब ट्रेन समय पर रवाना हो रही हैं, और प्लेटफॉर्म की सफाई तथा रखरखाव में भी सुधार देखा जा रहा है।
रेलवे का मानना है कि यह नीति यात्रियों के लिए दीर्घकालिक लाभ लेकर आएगी — क्योंकि सुरक्षा और अनुशासन दोनों एक साथ सुनिश्चित होंगे।
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Platform Ticket Alert 2025 का यात्रियों पर प्रभाव
Platform Ticket Alert 2025 लागू होने के बाद यात्रियों के अनुभव में काफी बदलाव देखने को मिला है। दिल्ली समेत देश के कई बड़े रेलवे स्टेशनों पर प्लेटफॉर्म टिकट की बिक्री पर रोक लगने से यात्रियों को मिश्रित प्रतिक्रियाएँ मिल रही हैं — कुछ लोगों ने इसे सुरक्षा के लिहाज़ से सही कदम बताया है, तो कुछ ने इसे असुविधाजनक करार दिया है।
रेलवे का उद्देश्य था भीड़ कम करके यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाना, लेकिन इसका सीधा असर उन लोगों पर पड़ा जो अपने परिवार के सदस्यों को छोड़ने या रिसीव करने स्टेशन आते थे। स्टेशन के अंदर प्रवेश की अनुमति केवल टिकटधारी यात्रियों को मिलने के कारण अब स्टेशन परिसर अपेक्षाकृत शांत तो है, पर मानवीय जुड़ाव और भावनाओं से जुड़ा दृश्य कहीं खो गया है।
यात्रियों के अनुसार, रेलवे को इस नीति के साथ कुछ सुविधाजनक विकल्प भी देने चाहिए ताकि जरूरत पड़ने पर लोग अपने परिवारजनों की मदद कर सकें।
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परिवार और बुजुर्ग यात्रियों की मुश्किलें
Platform Ticket Alert 2025 से सबसे अधिक परेशानी बुजुर्ग और महिला यात्रियों को हो रही है।
पहले जहां परिवार के सदस्य प्लेटफॉर्म तक जाकर उनका सामान उठाने, सीट तक पहुंचाने या ट्रेन का डिब्बा ढूंढने में मदद करते थे, अब यह संभव नहीं है।
कई मामलों में बुजुर्ग यात्री भारी सामान के साथ ट्रेन तक पहुंचने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं। खासकर नई दिल्ली, हजरत निजामुद्दीन और आनंद विहार जैसे बड़े स्टेशनों पर लंबी दूरी तय करनी पड़ती है।
रेलवे ने इस स्थिति से निपटने के लिए कुछ व्यवस्थाएँ शुरू की हैं —
स्टेशन प्रवेश द्वार पर पोर्टर (कुली) सेवा को बढ़ाया गया है।
हेल्प डेस्क और ई-व्हीलचेयर सुविधा को और मजबूत किया गया है।
वरिष्ठ नागरिकों के लिए “Assistance Booths” स्थापित किए जा रहे हैं जहाँ रेलवे कर्मचारी सहायता प्रदान करते हैं।
फिर भी, कई यात्रियों का कहना है कि जब तक परिजनों को प्लेटफॉर्म तक जाने की सीमित अनुमति नहीं दी जाती, तब तक यह समस्या पूरी तरह हल नहीं होगी।
आम लोगों के लिए वैकल्पिक उपाय क्या हैं?
रेलवे ने Platform Ticket Alert 2025 के बाद यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कुछ वैकल्पिक उपाय लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं।
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म टिकट सिस्टम (टेस्टिंग फेज में)
भारतीय रेलवे ने IRCTC और UTS ऐप के ज़रिए प्लेटफॉर्म टिकट को डिजिटल करने का प्रस्ताव रखा है। यह सुविधा फिलहाल कुछ स्टेशनों पर परीक्षण के रूप में शुरू की गई है।
Gate Zone Waiting Area:-
स्टेशन के प्रवेश द्वार के पास “गेट ज़ोन वेटिंग एरिया” बनाया जा रहा है, जहाँ बिना टिकट आए परिजन सुरक्षित रूप से अपने परिवार को विदा या स्वागत कर सकते हैं।
Smart Luggage Assistance:-
यात्रियों की मदद के लिए कुछ प्रमुख स्टेशनों पर “स्मार्ट लगेज ट्रॉली सर्विस” शुरू की जा रही है, ताकि उन्हें सामान ले जाने में किसी की सहायता की आवश्यकता न पड़े।
Real-time Updates:-
रेलवे ने मोबाइल नोटिफिकेशन और SMS अलर्ट के ज़रिए ट्रेन आगमन और प्रस्थान की लाइव जानकारी उपलब्ध कराना शुरू किया है, जिससे यात्रियों को बाहर ही सटीक जानकारी मिल सके।
इन सभी उपायों का उद्देश्य यह है कि सुरक्षा से समझौता किए बिना यात्रियों को सुविधाजनक अनुभव दिया जा सके।
रेलवे अधिकारियों का आधिकारिक बयान और भविष्य की योजना
Platform Ticket Alert 2025 लागू होने के बाद भारतीय रेलवे के अधिकारियों ने स्थिति पर विस्तृत स्पष्टीकरण दिया है। उनका कहना है कि यह फैसला यात्रियों की सुरक्षा और स्टेशन प्रबंधन को सुचारू रखने के लिए लिया गया है, न कि किसी असुविधा के लिए।
रेलवे बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि दिल्ली, मुंबई, लखनऊ, और चेन्नई जैसे बड़े स्टेशनों पर भीड़ नियंत्रण सबसे बड़ी चुनौती बन चुकी थी। इसलिए प्लेटफॉर्म टिकट की बिक्री अस्थायी रूप से रोकना एक “प्रिवेंटिव मेजर” (रोकथाम के कदम) के रूप में लिया गया है।
अधिकारियों के अनुसार, यह निर्णय स्थिति के विश्लेषण पर निर्भर करेगा — जैसे-जैसे भीड़ का दबाव कम होगा, वैसे-वैसे प्लेटफॉर्म टिकट बिक्री को फिर से खोला जा सकता है। रेलवे ने यह भी बताया कि इस अवधि के दौरान यात्रियों की प्रतिक्रियाओं और अनुभवों का भी विश्लेषण किया जाएगा ताकि भविष्य की नीतियों को और बेहतर बनाया जा सके।
क्या यह अस्थायी फैसला है या लंबे समय के लिए?
रेलवे ने साफ तौर पर कहा है कि Platform Ticket Alert 2025 एक अस्थायी निर्णय है, जिसे परिस्थितियों को देखते हुए लिया गया है। रेलवे बोर्ड ने इस फैसले की समीक्षा के लिए एक विशेष निगरानी समिति (Monitoring Committee) गठित की है, जो आने वाले महीनों में भीड़, सुरक्षा और यात्रियों की सुविधा से जुड़े डेटा का विश्लेषण करेगी।
यदि आंकड़े यह दिखाते हैं कि इस फैसले से स्टेशन की सुरक्षा व्यवस्था में सुधार हुआ है और ट्रेन संचालन अधिक सुचारू हुआ है, तो इसे कुछ स्टेशनों पर स्थायी रूप से लागू किया जा सकता है। वहीं, जिन स्थानों पर भीड़ का दबाव नियंत्रित रहेगा, वहां प्लेटफॉर्म टिकट की बिक्री पुनः शुरू करने की योजना है।
रेलवे अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि किसी भी बदलाव से पहले सार्वजनिक सूचना जारी की जाएगी, ताकि यात्रियों को किसी भी असुविधा का सामना न करना पड़े।
अन्य शहरों में भी क्या लागू होगा यह नियम?
Platform Ticket Alert 2025 फिलहाल मुख्य रूप से दिल्ली एनसीआर क्षेत्र के प्रमुख स्टेशनों पर लागू है — जिनमें नई दिल्ली, हजरत निजामुद्दीन, आनंद विहार, और दिल्ली सराय रोहिल्ला शामिल हैं।
लेकिन रेलवे ने संकेत दिया है कि यदि यह नीति सफल रहती है, तो इसे अन्य मेट्रो शहरों जैसे मुंबई, लखनऊ, पटना, और चेन्नई में भी लागू किया जा सकता है।
रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और स्टेशन निदेशालयों के बीच इस नीति को लेकर चर्चा जारी है। रेलवे ने यह भी कहा है कि हर शहर की स्थिति और यात्री दबाव अलग होता है, इसलिए एक समान नियम लागू करने से पहले स्थानीय आवश्यकताओं का अध्ययन किया जाएगा।
इसके अलावा, रेलवे “Phase-wise Implementation Plan” पर काम कर रहा है — जिसमें पहले बड़े जंक्शनों, फिर छोटे शहरों के स्टेशनों पर यह नीति लागू की जाएगी।
इसका उद्देश्य है — देशभर में सुरक्षित, भीड़-मुक्त और व्यवस्थित रेलवे स्टेशन वातावरण तैयार करना।
निष्कर्ष – Platform Ticket Alert 2025 से मिली सीख और आगे का रास्ता
Platform Ticket Alert 2025 केवल एक प्रशासनिक कदम नहीं, बल्कि यात्रियों और रेलवे दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण सीख है।
इस निर्णय ने यह स्पष्ट किया है कि बढ़ती भीड़ और सुरक्षा चुनौतियों के बीच रेलवे को लगातार अपने सिस्टम में सुधार करने की जरूरत है।
दिल्ली जैसे बड़े स्टेशनों पर यह नीति एक रियल-टाइम प्रयोग साबित हो रही है, जिसने दिखाया कि भीड़ नियंत्रित करने से न केवल सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होती है, बल्कि यात्रियों को अधिक सहज यात्रा अनुभव भी मिलता है।
हालांकि, इसके साथ यह भी स्वीकार करना होगा कि इस तरह के फैसलों का प्रभाव आम यात्रियों, विशेषकर बुजुर्गों और महिलाओं पर पड़ता है।
इसलिए आने वाले समय में रेलवे को ऐसे निर्णयों में यात्रियों की सुविधा और भावनात्मक जुड़ाव — दोनों का ध्यान रखना होगा।
यात्रियों की सुरक्षा बनाम सुविधा का संतुलन
Platform Ticket Alert 2025 ने एक अहम सवाल खड़ा किया है —
क्या सुरक्षा के नाम पर सुविधा से समझौता किया जा सकता है?
रेलवे का यह कदम निश्चित रूप से सुरक्षा के लिहाज़ से एक मजबूत निर्णय है, लेकिन इससे यात्रियों की सहजता पर असर पड़ा है।
आदर्श स्थिति यह होगी कि सुरक्षा और सुविधा दोनों का संतुलन बनाया जाए।
उदाहरण के लिए, सीमित संख्या में प्लेटफॉर्म टिकट की अनुमति देना या केवल डिजिटल माध्यम से अनुमति प्रदान करना — ऐसे विकल्प हो सकते हैं जिनसे भीड़ भी नियंत्रित रहे और यात्रियों की भावनाएँ भी जुड़ी रहें।
रेलवे के लिए चुनौती यही है कि वह तकनीक और प्रबंधन के ज़रिए सुरक्षा को बढ़ाए,
लेकिन यात्रियों के मानवीय पहलू को नज़रअंदाज़ न करे।
भविष्य में AI surveillance, स्मार्ट एंट्री सिस्टम और फेस स्कैनिंग तकनीक जैसे आधुनिक उपाय इस संतुलन को मजबूत कर सकते हैं।
रेलवे और जनता दोनों की जिम्मेदारी
Platform Ticket Alert 2025 से यह बात भी सामने आई है कि केवल रेलवे ही नहीं, बल्कि यात्रियों की भी संयुक्त जिम्मेदारी बनती है।
सुरक्षा और अनुशासन तभी कायम रह सकते हैं जब दोनों पक्ष सहयोग करें।
यात्रियों को यह समझना होगा कि प्लेटफॉर्म टिकट बंद करने जैसे कदम केवल रोक लगाने के लिए नहीं, बल्कि उनकी सुरक्षा और सुविधा को प्राथमिकता देने के लिए उठाए गए हैं।
वहीं, रेलवे को भी यात्रियों के लिए स्पष्ट और पारदर्शी संचार बनाए रखना चाहिए, ताकि किसी तरह की असमंजस या अफवाह न फैले।
अगर दोनों पक्ष समझदारी से काम लें, तो यह निर्णय भविष्य में एक “मॉडल पॉलिसी” के रूप में देश के सभी स्टेशनों पर लागू किया जा सकता है।
ऐसा करने से भारतीय रेलवे न केवल सुरक्षित बल्कि अधिक यात्रीकेंद्रित प्रणाली (Passenger-Centric System) के रूप में विकसित हो सकेगा।
FAQs: Platform Ticket Alert 2025 – यात्रियों के मन में उठ रहे प्रमुख सवाल
1) Platform Ticket Alert 2025 क्या है?
Ans- Platform Ticket Alert 2025 भारतीय रेलवे द्वारा लागू की गई एक अस्थायी नीति है जिसके तहत दिल्ली सहित कुछ प्रमुख स्टेशनों पर प्लेटफॉर्म टिकट की बिक्री बंद कर दी गई है।
इसका उद्देश्य यात्रियों की सुरक्षा और स्टेशन पर अनावश्यक भीड़ को नियंत्रित करना है।
अधिक जानकारी के लिए Indian Railways Official Website पर जाएँ।
2) दिल्ली रेलवे स्टेशन पर प्लेटफॉर्म टिकट कब से बंद हुए हैं?
Ans- रेलवे बोर्ड के अनुसार, Platform Ticket Alert 2025 फरवरी 2025 की शुरुआत से लागू किया गया है।
यह निर्णय भीड़ और सुरक्षा प्रबंधन की दृष्टि से अस्थायी तौर पर लिया गया है।
3) क्या यह निर्णय पूरे भारत में लागू है?
Ans- नहीं, फिलहाल यह नियम केवल कुछ बड़े स्टेशनों — जैसे नई दिल्ली, हजरत निजामुद्दीन, आनंद विहार, और दिल्ली सराय रोहिल्ला — पर लागू किया गया है।
अन्य शहरों में स्थिति की समीक्षा के बाद फैसला लिया जाएगा।
4) रेलवे ने Platform Ticket Alert 2025 क्यों लागू किया?
Ans- भारतीय रेलवे ने यह कदम त्योहार सीजन में बढ़ती भीड़, सुरक्षा जोखिम और स्टेशन पर अव्यवस्था को रोकने के लिए उठाया है।
रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने भी इस निर्णय को यात्रियों की सुरक्षा के लिए आवश्यक बताया है।
5) क्या प्लेटफॉर्म टिकट बिक्री पर रोक स्थायी है?
Ans- नहीं, यह अस्थायी फैसला है। रेलवे बोर्ड स्थिति की समीक्षा कर रहा है, और परिस्थितियाँ सामान्य होने पर टिकट बिक्री दोबारा शुरू की जा सकती है।
इस संबंध में अपडेट के लिए IRCTC Portal पर नजर रखें।
6) बुजुर्ग और परिवार यात्रियों को इससे क्या दिक्कतें हो रही हैं?
Ans- कई बुजुर्ग और महिला यात्रियों को असुविधा हो रही है क्योंकि उनके परिजन अब प्लेटफॉर्म तक नहीं जा पा रहे।
हालांकि, रेलवे ने पोर्टर सेवा और व्हीलचेयर सहायता जैसी सुविधाओं को बढ़ाया है ताकि उन्हें परेशानी कम हो।
7) क्या प्लेटफॉर्म टिकट ऑनलाइन खरीदे जा सकते हैं?
Ans- भारतीय रेलवे UTS ऐप और IRCTC वेबसाइट के माध्यम से डिजिटल प्लेटफॉर्म टिकट सिस्टम शुरू करने की दिशा में काम कर रहा है।
यह सुविधा कुछ स्टेशनों पर परीक्षण के तौर पर शुरू की गई है।
8) Platform Ticket Alert 2025 का यात्रियों पर क्या सकारात्मक असर हुआ है?
Ans- इस निर्णय के बाद स्टेशन पर भीड़ में उल्लेखनीय कमी आई है, जिससे सुरक्षा जांच, ट्रेन संचालन और सफाई व्यवस्था में सुधार हुआ है।
यात्रियों के लिए स्टेशन अब पहले से अधिक व्यवस्थित और सुरक्षित हैं।
9) क्या अन्य शहरों में भी यह नीति लागू होगी?
Ans- रेलवे बोर्ड ने कहा है कि यदि Platform Ticket Alert 2025 नीति सफल रहती है, तो इसे मुंबई, लखनऊ, चेन्नई, और पटना जैसे बड़े शहरों में भी लागू किया जा सकता है।
10) रेलवे यात्रियों की सुविधा के लिए क्या कदम उठा रहा है?
Ans- रेलवे अब गेट ज़ोन वेटिंग एरिया, स्मार्ट लगेज असिस्टेंस, और फेस स्कैनिंग टेक्नोलॉजी जैसी नई व्यवस्थाएँ ला रहा है ताकि यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा दोनों बनी रहें।
इन अपडेट्स के लिए आप Railway News Section – The Hindu पर नवीनतम समाचार पढ़ सकते हैं।
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