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धनतेरस 2025 – कब मनाई जाएगी और क्या है इसका विशेष महत्व

धनतेरस 2025 हर साल की तरह इस बार भी कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाई जाएगी। यह दिन दीपावली पर्व की शुरुआत का प्रतीक है और इसे धन एवं आरोग्य के देवता भगवान धन्वंतरि के जन्मदिन के रूप में भी जाना जाता है।
इस वर्ष धनतेरस 2025 का पर्व धन, स्वास्थ्य और समृद्धि तीनों का संगम लेकर आने वाला है। लोग इस दिन सोना, चांदी, बर्तन और नए सामान खरीदकर देवी लक्ष्मी का स्वागत करते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, धनतेरस का दिन समृद्धि की शुरुआत और शुभ ऊर्जा का प्रवेश कराने वाला होता है। यह पर्व केवल खरीदारी का प्रतीक नहीं बल्कि आध्यात्मिक रूप से सकारात्मकता और प्रकाश का उत्सव भी है।
धनतेरस 2025 की सही तिथि और वार
धनतेरस 2025 की तिथि पंचांग के अनुसार 24 अक्टूबर 2025, शुक्रवार को मनाई जाएगी।
इस दिन त्रयोदशी तिथि का आरंभ 24 अक्टूबर की सुबह 11:15 बजे से होगा और समाप्ति 25 अक्टूबर सुबह 9:45 बजे पर होगी।
शुभ मुहूर्त (Lakshmi Puja Muhurat):-
संध्या पूजन मुहूर्त: संध्या 6:45 बजे से 8:20 बजे तक (लगभग 1 घंटा 35 मिनट)
प्रदोष काल में दीपदान सबसे शुभ माना जाता है।
यह समय लक्ष्मी-गणेश पूजा, धन्वंतरि आराधना और दीप जलाने के लिए सर्वोत्तम रहेगा।
इस दिन खरीदी गई वस्तुएं पूरे वर्ष के लिए सौभाग्य और स्थिरता का प्रतीक बनती हैं।
इस दिन का ज्योतिषीय और धार्मिक महत्व
धनतेरस के दिन सूर्य तुला राशि में और चंद्रमा कुंभ राशि में स्थित होंगे — यह योग धन लाभ और नए अवसरों के उदय का संकेत देता है।
ज्योतिष के अनुसार, त्रयोदशी तिथि और शुक्रवार का संयोजन लक्ष्मी कृपा प्राप्ति के लिए अत्यंत मंगलकारी माना गया है।
इस दिन दीपक जलाने से कुंडली में शुक्र ग्रह मज़बूत होता है और जीवन में आर्थिक स्थिरता आती है।
धार्मिक दृष्टि से यह दिन भगवान धन्वंतरि की आराधना के लिए श्रेष्ठ माना जाता है, क्योंकि समुद्र मंथन के समय वे अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे।
इसी कारण इस दिन स्वास्थ्य, धन और दीर्घायु की कामना की जाती है।
क्यों कहते हैं धनतेरस को समृद्धि का आरंभ
धनतेरस को समृद्धि का आरंभ इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह दिन लक्ष्मी कृपा प्राप्त करने और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने का प्रतीक है।
मान्यता है कि इस दिन जो व्यक्ति दीपदान करता है, नए वस्त्र या धन-संपत्ति खरीदता है, उसके जीवन में वर्षभर सकारात्मक परिवर्तन और आर्थिक वृद्धि होती है।
भगवान धन्वंतरि के प्रकट होने के कारण यह दिन स्वास्थ्य और आयु वृद्धि से भी जुड़ा हुआ है।
वास्तव में, धनतेरस का संदेश यह है कि सच्ची समृद्धि केवल धन में नहीं, बल्कि अच्छे स्वास्थ्य, शांति और संतुलित जीवन में छिपी होती है।
इसलिए धनतेरस 2025 का पर्व न केवल भौतिक समृद्धि, बल्कि आध्यात्मिक प्रकाश और सकारात्मक सोच की शुरुआत का प्रतीक है।
धनतेरस 2025 का शुभ मुहूर्त और पूजा आरंभ करने का सही समय
धनतेरस 2025 का दिन केवल खरीदारी या दीपदान का अवसर नहीं है, बल्कि यह देवी लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि की कृपा प्राप्त करने का सबसे शुभ दिन माना गया है।
इस वर्ष, धनतेरस 2025 पर ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति अत्यंत अनुकूल रहने वाली है। इस दिन यदि पूजा और दीपदान सही समय पर किया जाए, तो जीवन में धन, स्वास्थ्य और सफलता की स्थायी वृद्धि होती है।
पौराणिक मान्यता है कि शुभ मुहूर्त में किया गया हर कार्य कई गुना फल प्रदान करता है — इसलिए समय का सही चयन धनतेरस की सबसे बड़ी कुंजी मानी जाती है।
पूजा और दीपदान करने का सर्वोत्तम समय
धनतेरस 2025 पर संध्या के समय प्रदोष काल में पूजा और दीपदान करना अत्यंत शुभ रहेगा।
इस वर्ष धनतेरस 2025 की पूजन का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त होगा –
शाम 6:46 बजे से रात 8:22 बजे तक (लगभग 1 घंटा 36 मिनट)।
इस समय में देवी लक्ष्मी, भगवान गणेश और भगवान धन्वंतरि की आराधना करने से कुंडली के शुक्र ग्रह की स्थिति मजबूत होती है और घर में धन प्रवाह बढ़ता है।
इस काल में जलाए गए दीपक आर्थिक अंधकार को दूर करने और सकारात्मक ऊर्जा को आमंत्रित करते हैं।
दीपदान का शुभ क्रम:
घर के मुख्य द्वार पर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके दीप जलाएं।
तुलसी चौरे में एक दीपक जलाना शुभता लाता है।
रसोई और तिजोरी के पास दीपक रखने से घर में स्थिर लक्ष्मी का वास होता है।
टिप: प्रदोष काल का समय हर स्थान के अनुसार थोड़ा अलग हो सकता है, इसलिए सटीक स्थानीय मुहूर्त जानने के लिए Drik Panchang या TimeandDate जैसी विश्वसनीय साइट देखें।
धनतेरस 2025 खरीदारी के लिए सबसे लाभदायक घड़ी
धनतेरस के दिन की पहचान ही शुभ खरीदारी से होती है।
पंचांग के अनुसार, 24 अक्टूबर 2025 को धनतेरस पर खरीदारी के लिए सबसे लाभकारी मुहूर्त होगा:
दोपहर 1:25 बजे से दोपहर 2:55 बजे तक, और शाम 6:46 बजे से 8:22 बजे तक।
इन दोनों समयों में खरीदी गई वस्तुएं जीवन में स्थायी धन और सौभाग्य का प्रतीक मानी जाती हैं।
इस समय सोना, चांदी, बर्तन या इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएं खरीदना आर्थिक समृद्धि का संकेत देता है।
खास बात यह है कि शुभ मुहूर्त में की गई खरीदारी सिर्फ वैभव ही नहीं बढ़ाती बल्कि नकारात्मक शक्तियों से रक्षा भी करती है।
खरीदारी के दौरान ध्यान रखें:
पहली खरीदी हमेशा धातु या मिट्टी की वस्तु की करें।
झाड़ू या दीपक खरीदना भी अत्यंत शुभ माना गया है।
इस दिन उधार लेने या कर्ज चुकाने से बचें — यह आर्थिक असंतुलन ला सकता है।
शुभ मुहूर्त में किए गए कार्यों का धार्मिक प्रभाव
धनतेरस पर किए गए हर कार्य का महत्व केवल सांसारिक नहीं बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा से भी जुड़ा होता है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शुभ मुहूर्त वह समय होता है जब ग्रहों की चाल सकारात्मक कंपन (positive vibrations) उत्पन्न करती है।
इस दौरान किया गया कार्य तीन गुना अधिक फलदायी माना जाता है।
धनतेरस 2025 के शुभ मुहूर्त में यदि व्यक्ति दान, दीपदान, पूजा या खरीदारी करता है, तो उसे जीवन में दीर्घकालिक समृद्धि और शांति प्राप्त होती है।
यह भी कहा जाता है कि प्रदोष काल में जलाया गया एक दीप कर्मों के अंधकार को मिटा देता है और घर में लक्ष्मी का स्थायी वास सुनिश्चित करता है।
इसलिए धनतेरस पर शुभ समय में उठाया गया हर कदम केवल भौतिक लाभ नहीं देता, बल्कि आध्यात्मिक उन्नति और मन की स्थिरता भी प्रदान करता है।
धनतेरस 2025 की पूजा विधि – घर में कैसे करें मां लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि की आराधना
धनतेरस 2025 का दिन केवल सोना-चांदी खरीदने का नहीं, बल्कि देवी लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि की कृपा प्राप्त करने का सबसे शुभ अवसर है।
यह पर्व दीपावली की शुरुआत का प्रतीक है और इसे “धन त्रयोदशी” भी कहा जाता है।
इस दिन यदि घर में विधिवत पूजा की जाए, तो आर्थिक प्रगति, सुख-शांति और स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है।
पूजा का आरंभ हमेशा शुद्ध मन, स्वच्छ वातावरण और श्रद्धा भाव से करना चाहिए।
नीचे दी गई विधि में बताया गया है कि धनतेरस 2025 पर घर में पूजा कैसे करें ताकि देवी लक्ष्मी की कृपा स्थायी रूप से प्राप्त हो।
पूजा के लिए जरूरी वस्तुओं की तैयारी
धनतेरस की पूजा में उपयोग होने वाली वस्तुएं पवित्रता और पूर्णता का प्रतीक होती हैं।
पूजा से पहले सभी सामग्री को एक साफ थाल में क्रमवार रख लेना चाहिए।
धनतेरस 2025 पूजा सामग्री सूची:
मां लक्ष्मी, भगवान गणेश और भगवान धन्वंतरि की प्रतिमा या चित्र
तांबे या चांदी का कलश (पानी, सुपारी, आम पत्ता, नारियल सहित)
चावल, रोली, हल्दी, दीपक, कपूर और फूल
पांच प्रकार के फल, मिठाई और पंचमेवा
नए बर्तन या सिक्के (धनतेरस की पहचान इन्हीं से होती है)
घी या सरसों के तेल के दीपक
तुलसी पत्ता और पीली सरसों
एक छोटा आसन या लकड़ी का पट्टा (जिस पर पूजा की जाए)
इन वस्तुओं को दक्षिण दिशा की ओर रखकर पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
साथ ही, घर की सफाई और मुख्य द्वार की सजावट भी मां लक्ष्मी के स्वागत के लिए आवश्यक है।
सरल चरणों में पूरी धनतेरस पूजा प्रक्रिया
धनतेरस 2025 की पूजा विधि बेहद सरल है, बस ध्यान रहे कि पूजा प्रदोष काल (शाम 6:46 बजे से 8:22 बजे) में ही की जाए।
पूजा के मुख्य चरण:
सबसे पहले घर के प्रवेश द्वार पर दीपक जलाएं, यह देवी लक्ष्मी का स्वागत दर्शाता है।
घर के मंदिर या पूजा स्थल को फूलों और दीपों से सजाएं।
कलश को स्थापित करें और उसके ऊपर नारियल रखकर भगवान धन्वंतरि का आह्वान करें।
भगवान गणेश का ध्यान करें — “ॐ गणपतये नमः” मंत्र का जाप करें।
अब मां लक्ष्मी की आराधना करें — उन्हें चावल, फूल और दीप अर्पित करें।
धनतेरस पर नए बर्तन या सिक्के पूजा में रखें और उन पर जल, रोली व अक्षत छिड़कें।
पूजा के बाद लक्ष्मी आरती और धन्वंतरि स्तोत्र का पाठ करें।
अंत में पूरे घर में दीपक जलाएं — इससे “अंधकार पर प्रकाश” का संदेश प्रसारित होता है।
ध्यान रखें, इस दिन पूजा करने वाला व्यक्ति उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठे तो यह और अधिक फलदायी माना जाता है।
धन प्राप्ति के लिए बोले जाने वाले शुभ मंत्र और आरती
धनतेरस 2025 पर बोले जाने वाले मंत्र आध्यात्मिक ऊर्जा को जागृत करते हैं और घर में धन-संपत्ति के स्थायी वास का मार्ग बनाते हैं।
मां लक्ष्मी मंत्र:
“ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्री सिद्ध लक्ष्म्यै नमः॥”
इस मंत्र का 108 बार जप करने से धन, सौभाग्य और सफलता की प्राप्ति होती है।
भगवान धन्वंतरि मंत्र:
“ॐ नमो भगवते धन्वंतरये अमृतकलश हस्ताय सर्वभय विनाशाय नमः॥”
इस मंत्र से आरोग्य, दीर्घायु और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है।
लक्ष्मी आरती (संक्षिप्त रूप):
“जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता,
तुम्हे निसदिन सेवत, हर विष्णु विधाता॥”
आरती के बाद घर में दीपों की पंक्ति जलाने से लक्ष्मी कृपा स्थिर होती है और धन हानि के योग समाप्त होते हैं।
पूजा समाप्ति पर प्रसाद बांटें और परिवार के सभी सदस्य एक साथ दीपक जलाकर “शुभ लाभ” का आशीर्वाद लें।
धनतेरस 2025 पर धन-संपत्ति बढ़ाने के आसान उपाय
धनतेरस 2025 केवल पूजा या खरीदारी का पर्व नहीं है, बल्कि यह वह दिन है जब मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए किए गए छोटे-छोटे कर्म पूरे वर्ष के लिए धन-संपत्ति और समृद्धि का द्वार खोल देते हैं।
इस शुभ अवसर पर कुछ पारंपरिक उपाय और आचरण ऐसे हैं जिन्हें अपनाने से घर में स्थायी लक्ष्मी का वास होता है और आर्थिक उन्नति के योग बनते हैं।
आइए जानते हैं वे सरल लेकिन प्रभावशाली उपाय जो इस धनतेरस पर आपकी समृद्धि की दिशा बदल सकते हैं।
घर की समृद्धि के लिए किए जाने वाले शुभ कर्म
धनतेरस के दिन घर में सकारात्मक ऊर्जा और धन की स्थिरता बनाए रखने के लिए कुछ शुभ कार्य करना अत्यंत लाभकारी माना गया है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, धनतेरस 2025 पर यदि व्यक्ति अपने घर को स्वच्छ रखकर दीप जलाता है, तो मां लक्ष्मी प्रसन्न होकर स्थायी रूप से निवास करती हैं।
घर की समृद्धि बढ़ाने के उपाय:
मुख्य द्वार पर स्वस्तिक और ओम् का चिन्ह बनाएं – यह शुभता और सुरक्षा का प्रतीक है।
घी या सरसों के तेल का दीपक जलाएं – यह नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है।
रसोईघर और तिजोरी के पास दीपक रखें – इससे धन का प्रवाह बढ़ता है।
श्रीसूक्त या लक्ष्मी चालीसा का पाठ करें – यह मानसिक शांति और आर्थिक स्थिरता प्रदान करता है।
घर के बुजुर्गों और जरूरतमंदों का आशीर्वाद लें – ऐसा करने से सौभाग्य के द्वार खुलते हैं।
ध्यान रखें: घर में झाड़ू खरीदकर उत्तर दिशा में रखें — यह दरिद्रता को दूर करने वाला शुभ संकेत माना जाता है।
दीपक जलाने की दिशा और समय का महत्व
धनतेरस पर दीपक जलाना अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक है।
लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि दीपक की दिशा और समय आर्थिक प्रगति पर गहरा प्रभाव डालते हैं।
दीपदान के नियम (धनतेरस 2025):
मुख्य द्वार पर दक्षिण दिशा की ओर मुख वाला दीपक रखें – इससे धन स्थिर रहता है।
रसोईघर में पूर्व दिशा की ओर दीपक जलाएं – यह घर में अन्न व समृद्धि लाता है।
तुलसी चौरे पर पश्चिम दिशा की ओर दीपक रखें – यह नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त करता है।
दीपक जलाने का सर्वोत्तम समय: संध्या 6:46 बजे से 8:22 बजे (प्रदोष काल)।
दीपदान के इस समय में किया गया प्रकाश कर्म लक्ष्मी कृपा के द्वार खोलता है और पूरे वर्ष घर में शुभ कंपन (positive vibrations) बनाए रखता है।
इस दिन दीपक जलाना सिर्फ एक परंपरा नहीं बल्कि आध्यात्मिक उपचार (spiritual healing) का भी माध्यम है।
व्यापार में वृद्धि के लिए आज़माए जाने वाले पारंपरिक उपाय
धनतेरस को व्यापारी वर्ग विशेष रूप से धन लाभ और नए अवसरों की शुरुआत के लिए अत्यंत शुभ मानता है।
यदि आप व्यवसाय से जुड़े हैं, तो धनतेरस 2025 आपके लिए नए सौभाग्य का संकेत लेकर आएगा।
व्यापार वृद्धि के पारंपरिक उपाय:
अपने ऑफिस या दुकान की तिजोरी में लाल कपड़ा बिछाकर श्री यंत्र स्थापित करें।
पहली रसीद या लेखा-जोखा देवी लक्ष्मी के नाम से शुरू करें।
दुकान के प्रवेश द्वार पर पांच दीपक जलाएं — यह ग्राहकों की वृद्धि का प्रतीक है।
कुबेर मंत्र का जाप करें:
“ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये नमः॥”
यह मंत्र व्यापार में वृद्धि और धन संचय में सहायक होता है।
किसी गरीब या कर्मचारी को मिठाई और कपड़े दान करें — ऐसा करने से कर्मफल शुद्ध होता है और व्यापार में सफलता सुनिश्चित होती है।
इन उपायों को प्रदोष काल में करने से व्यवसायिक स्थिरता, प्रतिष्ठा और लाभ तीनों प्राप्त होते हैं।
धनतेरस का यह दिन नए आरंभ और आर्थिक विकास के लिए सर्वश्रेष्ठ समय माना गया है।
धनतेरस की पौराणिक कथा – एक दीपक जिसने बचाई राजा के पुत्र की जान
धनतेरस 2025 का त्योहार न केवल खरीदारी या पूजा का प्रतीक है, बल्कि यह एक गहरी पौराणिक कथा और प्रेरणा को भी समेटे हुए है।
इस दिन से जुड़ी दो प्रमुख कथाएं हैं — एक राजा हेमचंद्र और उनके पुत्र की लोककथा, और दूसरी भगवान धन्वंतरि के समुद्र मंथन से प्रकट होने की कथा।
दोनों ही कहानियाँ धन, स्वास्थ्य और जीवन के संतुलन का संदेश देती हैं।
राजा हेमचंद्र और उनके पुत्र की लोककथा
बहुत समय पहले की बात है, हेमचंद्र नामक एक राजा अपनी प्रजा के साथ सुखपूर्वक जीवन व्यतीत करता था।
एक दिन ज्योतिषियों ने राजा से कहा कि उनके पुत्र की मृत्यु सर्पदंश से सोलहवें वर्ष की त्रयोदशी तिथि पर निश्चित है।
यह सुनकर राजा और रानी अत्यंत दुखी हुए, परंतु उन्होंने हार नहीं मानी।
जब वह तिथि आई, तो राजकुमार के कक्ष के बाहर चारों ओर दीपक जलाए गए, दरवाजे पर सोने-चांदी के सिक्कों का ढेर लगाया गया और बहुत सारी चमकदार वस्तुएँ रखी गईं ताकि यमराज के दूत की दृष्टि पुत्र से हट जाए।
रातभर राजकुमार अपने कमरे में भजन गाता रहा और दीपकों की लौ जलती रही।
कथा के अनुसार, जब यमराज के दूत मृत्यु संदेश लेकर पहुंचे, तो दीपों की चमक और स्वर्ण की आभा से उनकी आंखें चकाचौंध हो गईं।
वे राजकुमार के प्राण लिए बिना ही लौट गए।
उस दिन से दीपक जलाने और धन का पूजन करने की परंपरा शुरू हुई, जिसे आज हम धनतेरस के रूप में मनाते हैं।
- यह कथा यह संदेश देती है कि प्रकाश और श्रद्धा से हम मृत्यु, भय और दुर्भाग्य को भी परास्त कर सकते हैं।
समुद्र मंथन से प्रकट हुए भगवान धन्वंतरि की कथा
धनतेरस का एक और अत्यंत प्रसिद्ध धार्मिक संदर्भ समुद्र मंथन से जुड़ा है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब देवता और असुरों ने क्षीर सागर का मंथन किया, तब उससे चौदह अमूल्य रत्न निकले।
उसी क्रम में भगवान धन्वंतरि प्रकट हुए, जिनके हाथ में अमृत से भरा कलश था।
भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद और चिकित्सा विज्ञान का जनक माना जाता है।
उनके प्रकट होने का दिन ही धनतेरस कहलाया, जिसका अर्थ है — “धन (स्वास्थ्य और समृद्धि) की प्राप्ति का दिन।”
इस दिन लोग भगवान धन्वंतरि की पूजा कर आरोग्य, दीर्घायु और रोगमुक्त जीवन की कामना करते हैं।
इस प्रकार, धनतेरस का संबंध केवल भौतिक धन से नहीं बल्कि स्वास्थ्य और संतुलन के अमृत से भी है।
इन दोनों कथाओं से जुड़ा धनतेरस का वास्तविक अर्थ
दोनों कथाओं से यह स्पष्ट होता है कि धनतेरस का वास्तविक अर्थ केवल सोना-चांदी या खरीदारी तक सीमित नहीं है।
इस दिन का सबसे बड़ा संदेश है —
“प्रकाश से अंधकार पर विजय, और श्रद्धा से भय पर विजय।”
राजा हेमचंद्र की कथा हमें दीपक के प्रतीकात्मक महत्व को बताती है, जो जीवन में आशा और सुरक्षा का प्रकाश फैलाता है।
वहीं भगवान धन्वंतरि की कथा हमें यह सिखाती है कि स्वास्थ्य ही सबसे बड़ा धन है।
धनतेरस 2025 पर जब आप दीप जलाते हैं, तो वह केवल घर की दीवारों को नहीं बल्कि मन के अंधकार को भी प्रकाशित करता है।
यही कारण है कि इस दिन को “धन की वर्षा और प्रकाश की विजय का पर्व” कहा जाता है।
- इसलिए धनतेरस मनाने का अर्थ है — सिर्फ धन अर्जन नहीं, बल्कि मन, तन और कर्म से पूर्ण समृद्धि प्राप्त करना।
धनतेरस 2025 पर घर सजाने और शुभता बढ़ाने के तरीके
धनतेरस 2025 का पर्व सिर्फ पूजा और खरीदारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वह दिन है जब घर की सजावट और वातावरण की सकारात्मकता देवी लक्ष्मी को आकर्षित करती है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जिस घर में सफाई, सुगंध और प्रकाश का संगम होता है, वहां स्थायी रूप से लक्ष्मी का वास होता है।
इसलिए इस शुभ अवसर पर घर की सजावट सिर्फ सौंदर्य नहीं बल्कि आध्यात्मिक महत्व रखती है।
प्रवेश द्वार और पूजन स्थल की पारंपरिक सजावट
धनतेरस 2025 पर घर की सजावट की शुरुआत मुख्य द्वार से करनी चाहिए, क्योंकि यहीं से शुभ ऊर्जा और देवी लक्ष्मी का प्रवेश होता है।
प्रवेश द्वार सजाने के शुभ उपाय:
मुख्य दरवाजे पर आम और अशोक के पत्तों का तोरण लगाएं — यह घर में शुभता और ताजगी बनाए रखता है।
दरवाजे के दोनों ओर घी के दीपक जलाएं ताकि प्रवेश द्वार पर प्रकाश बना रहे।
स्वस्तिक, ओम् और शुभ-लाभ के चिन्ह लाल रोली या हल्दी से बनाएं।
दरवाजे के बाहर छोटे सिक्के या चावल से भरा कलश रखें — यह समृद्धि का प्रतीक है।
पूजन स्थल पर ताजे फूल, चंदन और कपूर का प्रयोग करें ताकि वातावरण पवित्र बना रहे।
- ध्यान दें: पूजन स्थल हमेशा उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) दिशा में होना चाहिए, क्योंकि यह दिशा लक्ष्मी और विष्णु का प्रिय स्थान मानी जाती है।
रंगोली और शुभ प्रतीकों के पीछे का रहस्य
धनतेरस के अवसर पर रंगोली केवल सजावट नहीं, बल्कि देवी लक्ष्मी को आमंत्रित करने का माध्यम है।
रंगोली बनाना एक सकारात्मक ऊर्जा का विज्ञान माना जाता है, क्योंकि यह घर की नकारात्मक तरंगों को समाप्त करती है और मानसिक शांति प्रदान करती है।
धनतेरस 2025 के लिए रंगोली के शुभ प्रतीक:
कमल का फूल: लक्ष्मीजी का आसन, धन और सौंदर्य का प्रतीक।
शंख और चक्र: सकारात्मक तरंगें फैलाने वाले शुभ चिह्न।
पदचिह्न (लक्ष्मी के पांव): यह दर्शाता है कि लक्ष्मी घर में प्रवेश कर रही हैं।
दीपक और कलश की आकृति: शांति और समृद्धि का संकेत।
- रंगों में लाल, पीला, नारंगी और सफेद का उपयोग करना शुभ माना गया है।
- इन रंगों से बनी रंगोली न केवल मन को प्रसन्न करती है बल्कि घर में ऊर्जात्मक संतुलन भी बनाए रखती है।
- छोटा उपाय: रंगोली बनाते समय “ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्री लक्ष्म्यै नमः” मंत्र का जप करने से उसका आध्यात्मिक प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है।
सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने के घरेलू उपाय
धनतेरस के अवसर पर घर में सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखना देवी लक्ष्मी की कृपा प्राप्ति के लिए आवश्यक है।
पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, घर का वातावरण जितना स्वच्छ और प्रकाशमय होगा, उतनी ही धन और स्वास्थ्य की वृद्धि होगी।
घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने के उपाय:
घर के प्रत्येक कोने में दीपक जलाएं — विशेषकर उत्तर दिशा में, क्योंकि यह धन की दिशा मानी जाती है।
कपूर या गुग्गुल की धूप जलाएं, इससे नकारात्मक ऊर्जा नष्ट होती है।
तुलसी के पौधे के पास हर शाम दीपक जलाएं — यह वातावरण को शुद्ध करता है।
घर में नमक के पानी से पोंछा लगाना भी नकारात्मक कंपन को दूर करता है।
दिनभर मन में “शुभ लाभ” और “सर्वे भवन्तु सुखिनः” का भाव रखें — यह मानसिक शांति और स्थिरता देता है।
- धनतेरस 2025 पर इन छोटे उपायों को अपनाकर आप घर में सकारात्मक ऊर्जा, शांति और लक्ष्मी कृपा को स्थायी रूप से आमंत्रित कर सकते हैं।
धनतेरस 2025 पर क्या खरीदें – शुभ वस्तुओं की पूरी लिस्ट
धनतेरस 2025 का दिन पूरे वर्ष का सबसे शुभ दिन माना जाता है, जब हर नया ख़रीदा गया सामान धन और सौभाग्य लाता है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन की गई खरीदी केवल भौतिक सुख नहीं देती, बल्कि आध्यात्मिक समृद्धि और लक्ष्मी कृपा का प्रतीक बनती है।
अगर आप यह सोच रहे हैं कि धनतेरस 2025 पर क्या खरीदना शुभ रहेगा, तो नीचे दी गई सूची और दिशानिर्देश आपके लिए बेहद उपयोगी होंगे।
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सोना, चांदी और बर्तन खरीदने का सही समय
धनतेरस पर सोना, चांदी और धातु की वस्तुएं खरीदना धन वृद्धि और स्थायी सौभाग्य का प्रतीक है।
इस वर्ष धनतेरस 2025 का शुभ मुहूर्त 24 अक्टूबर, शुक्रवार को शाम 6:46 बजे से 8:22 बजे तक (प्रदोष काल) रहेगा।
इसी समय की गई खरीदारी को अत्यंत मंगलकारी माना गया है।
खरीदने के शुभ विकल्प:
सोने या चांदी के सिक्के जिन पर लक्ष्मी-गणेश का चित्र अंकित हो।
चांदी की कटोरी, चम्मच या ग्लास — यह धन स्थिरता का प्रतीक है।
नया बर्तन (पीतल, तांबा या स्टील का) — इसे घर की तिजोरी में रखा जाता है।
चांदी की लक्ष्मी-गणेश प्रतिमा — जो घर में धन का प्रवेश कराती है।
सोने की ज्वेलरी या छोटा सिक्का — इसे खरीदना दीर्घकालिक समृद्धि देता है।
- महत्वपूर्ण टिप: खरीदारी करते समय “ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्री लक्ष्म्यै नमः” मंत्र का जप करें, इससे वस्तु शुभ ऊर्जा से भर जाती है।
इस दिन क्या न खरीदें – धार्मिक दृष्टि से निषिद्ध वस्तुएं
जहां धनतेरस पर शुभ वस्तुओं की खरीद से समृद्धि आती है, वहीं कुछ चीजें ऐसी भी हैं जिन्हें खरीदना धार्मिक दृष्टि से अशुभ माना गया है।
धनतेरस 2025 पर इन वस्तुओं को न खरीदें:
कांच की वस्तुएं या टूटी हुई चीजें — यह दुर्भाग्य का प्रतीक मानी जाती हैं।
लोहे या एल्यूमिनियम के बर्तन — इनसे घर की ऊर्जा असंतुलित होती है।
काले रंग की वस्तुएं — यह नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करती हैं।
तेज़ धार वाले औजार (चाकू, कैंची, ब्लेड) — यह घर में विवाद और कटुता का संकेत देती हैं।
पुराने या सेकेंड हैंड सामान — ये पुराने दोष और ऊर्जा को साथ लाते हैं।
- याद रखें, धनतेरस पर खरीदी गई वस्तु पूरे वर्ष सौभाग्य और स्थिरता का संकेत देती है। इसलिए हमेशा नई और पवित्र चीजें ही खरीदें।
आधुनिक युग में धनतेरस पर स्मार्ट निवेश के विकल्प
आज के समय में धनतेरस सिर्फ पारंपरिक खरीदारी तक सीमित नहीं रही।
आधुनिक युग में लोग अब इस दिन को स्मार्ट निवेश और आर्थिक स्थिरता की शुरुआत के रूप में भी मनाते हैं।
धनतेरस 2025 पर आधुनिक निवेश विकल्प:
डिजिटल गोल्ड (Digital Gold): अब ऑनलाइन सोना खरीदना आसान और सुरक्षित विकल्प है।
म्यूचुअल फंड SIP शुरू करें: यह दीर्घकालिक धन वृद्धि का प्रतीक कदम है।
सोने के बॉन्ड (Sovereign Gold Bonds) — सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त और टैक्स लाभदायक विकल्प।
फिक्स्ड डिपॉज़िट या गोल्ड ETF में निवेश: आर्थिक सुरक्षा और रिटर्न का संतुलन।
नई प्रॉपर्टी या वाहन की बुकिंग: शुभ दिन पर की गई बुकिंग भविष्य की सफलता का संकेत देती है।
- महत्वपूर्ण बात: निवेश से पहले हमेशा शुभ मुहूर्त (6:46 PM से 8:22 PM) का पालन करें और शुरुआत “श्री गणेशाय नमः” से करें।
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धनतेरस 2025 से जुड़ी मान्यताएं और लोक परंपराएं
धनतेरस 2025 का पर्व भारत के हर कोने में धन, स्वास्थ्य और प्रकाश के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है।
यह केवल खरीदारी का त्योहार नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और संस्कृति का उत्सव है।
भारत में हर क्षेत्र में धनतेरस मनाने का अपना अलग तरीका है — कहीं इसे लक्ष्मी पूजन के रूप में तो कहीं धन्वंतरि जयंती के रूप में मनाया जाता है।
इस दिन लोग मानते हैं कि घर में दीपक, स्वच्छता और सकारात्मक विचारों का संगम देवी लक्ष्मी को आकर्षित करता है।
धनतेरस की मान्यताओं और लोक परंपराओं में हमें यह सीख मिलती है कि सच्चा धन केवल सोना या चांदी नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, शांति और सद्भावना है।
ग्रामीण भारत में धनतेरस का पारंपरिक रूप
ग्रामीण भारत में धनतेरस आज भी अपने मूल स्वरूप में मनाई जाती है।
गांवों में यह त्योहार खेतों, पशुओं और गृहस्थ जीवन की समृद्धि से जुड़ा हुआ है।
किसान इस दिन नए कृषि उपकरण खरीदते हैं, अपने बैलों और औजारों को सजाते हैं तथा खेतों की मिट्टी को पूजते हैं।
ग्रामीण परंपराओं की झलक:
लोग घर और आंगन की सफाई करते हैं, फिर गोबर और मिट्टी से दीवारों पर शुभ चिन्ह बनाते हैं।
दीपक जलाकर अन्न भंडार के पास रखा जाता है ताकि आने वाला वर्ष अन्नपूर्णा रहे।
महिलाएं धान या गेहूं के दानों से लक्ष्मी का आह्वान करती हैं।
ग्रामीण समुदाय में सामूहिक दीपदान किया जाता है — यह सामूहिक समृद्धि का प्रतीक है।
- ग्रामीण भारत में धनतेरस का उद्देश्य केवल धन-संपत्ति अर्जन नहीं, बल्कि प्रकृति और श्रम के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना है।
शहरी जीवन में बदलती पूजा विधियां और रिवाज
शहरी क्षेत्रों में धनतेरस 2025 का स्वरूप कुछ आधुनिक जरूर हुआ है, लेकिन इसकी आध्यात्मिक भावना आज भी बरकरार है।
लोग अब ऑनलाइन पूजा सामग्री, डिजिटल गोल्ड खरीदारी, और वर्चुअल आरती के माध्यम से इस त्योहार को मनाते हैं।
आधुनिक बदलावों की झलक:
घरों और सोसाइटियों में सामूहिक लक्ष्मी पूजन का चलन बढ़ा है।
लोग LED दीयों और सुगंधित मोमबत्तियों से सजावट करते हैं।
ऑनलाइन दान और डिजिटल लेनदेन को शुभ मानकर अपनाया जा रहा है।
कुछ परिवार आयुर्वेदिक स्वास्थ्य उत्पाद खरीदते हैं, भगवान धन्वंतरि की कृपा प्राप्ति के प्रतीक स्वरूप।
- इन आधुनिक परिवर्तनों के बावजूद, लोगों के मन में धनतेरस की वही भावना जीवित है — “प्रकाश फैलाना और समृद्धि बांटना।”
समाज में धनतेरस का सांस्कृतिक और आध्यात्मिक प्रभाव
धनतेरस का प्रभाव केवल धार्मिक स्तर तक सीमित नहीं है; यह भारत के समाज, संस्कृति और जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा है।
यह त्योहार हमें सिखाता है कि सच्चा धन दूसरों के साथ खुशियाँ बांटने में है।
आध्यात्मिक दृष्टिकोण:
यह दिन हमें याद दिलाता है कि सकारात्मक सोच, परिश्रम और विश्वास ही स्थायी समृद्धि लाते हैं।
दीपक जलाना केवल प्रतीक नहीं, बल्कि अज्ञान के अंधकार को मिटाने का संदेश है।
सामूहिक रूप से दीपदान करना समाज में एकता, सहयोग और प्रकाश का प्रसार करता है।
- धनतेरस 2025 का सांस्कृतिक सार यही है कि जब हम अपने भीतर के अंधकार को दूर करते हैं, तभी सच्ची लक्ष्मी (ज्ञान, शांति और प्रेम) हमारे जीवन में प्रवेश करती है।
निष्कर्ष – धनतेरस 2025 का वास्तविक संदेश और प्रेरणा
धनतेरस 2025 केवल सोना-चांदी खरीदने का दिन नहीं, बल्कि जीवन में प्रकाश और सकारात्मकता का उत्सव है।
यह त्योहार हमें सिखाता है कि सच्चा धन हमारे कर्म, विचार और व्यवहार में छिपा है।
जब घर में दीपक जलते हैं, तो वह केवल दीवारों को नहीं बल्कि मन के अंधकार को भी उजाला देते हैं।
धनतेरस हमें यह याद दिलाता है कि हर शुभ कार्य का आरंभ प्रकाश से करें, हर दिन को नई ऊर्जा और आशा के साथ जिएं, और हर व्यक्ति के जीवन में प्रेम और प्रकाश बांटें।
सच्ची समृद्धि केवल धन में नहीं, कर्म में छिपी है
पौराणिक कथाओं से लेकर आधुनिक जीवन तक, धनतेरस का सबसे बड़ा संदेश यही है —
धन से अधिक मूल्यवान है अच्छा कर्म और सच्ची निष्ठा।
कर्म ही वह दीपक है जो जीवन के अंधकार को मिटाकर हमें सच्ची समृद्धि की ओर ले जाता है।
धनतेरस 2025 पर जब हम नए वस्त्र, सोना या बर्तन खरीदते हैं, तो उसका उद्देश्य केवल भौतिक सुख नहीं होना चाहिए, बल्कि यह संकल्प भी होना चाहिए कि —
“हम अपने कर्मों से दूसरों के जीवन में भी रोशनी फैलाएंगे।”
- सच्ची समृद्धि वहीं होती है जहाँ कर्म में पवित्रता, मन में श्रद्धा और जीवन में संतुलन होता है।
सकारात्मक सोच से जीवन में आती है लक्ष्मी कृपा
धनतेरस 2025 का दूसरा महत्वपूर्ण संदेश है — सकारात्मक सोच ही लक्ष्मी कृपा का सच्चा स्रोत है।
जैसे दीपक का प्रकाश अंधकार को मिटा देता है, वैसे ही सकारात्मक विचार जीवन की नकारात्मकता को समाप्त करते हैं।
आध्यात्मिक दृष्टि से:
जब हम आभार व्यक्त करते हैं, तो जीवन में और अधिक समृद्धि आकर्षित होती है।
जब हम दूसरों की मदद करते हैं, तो लक्ष्मी कृपा स्वतः हमारे घर का मार्ग ढूंढ लेती है।
जब हमारा मन शांत और संतुलित होता है, तो वही मन “धन और सुख” दोनों को स्थायी बना देता है।
- इसलिए, धनतेरस केवल पूजा का दिन नहीं बल्कि आत्मचिंतन और मन की सकारात्मकता बढ़ाने का अवसर भी है।
धनतेरस का सार – उजाला फैलाएं, अंधकार मिटाएं
धनतेरस 2025 का सबसे गहरा अर्थ यही है — प्रकाश फैलाना और अंधकार मिटाना।
यह दिन हमें प्रेरित करता है कि हम ईर्ष्या, लोभ और नकारात्मकता जैसे अंधकारों को पीछे छोड़कर ज्ञान, दया और प्रेम का दीप जलाएं।
- जब हम दूसरों के जीवन में रोशनी लाते हैं, तो वह प्रकाश हमारे जीवन में कई गुना होकर लौटता है।
इस दिन का दीपक केवल घर की सजावट नहीं, बल्कि आशा, साहस और एक नए आरंभ का प्रतीक है। - इसलिए इस धनतेरस 2025 पर सिर्फ अपने घर को नहीं, बल्कि अपने मन, विचार और कर्म को भी प्रकाशित करें — यही इस पर्व का वास्तविक सार है।
धनतेरस 2025 – संबंधित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1) धनतेरस 2025 कब मनाई जाएगी?
Ans- धनतेरस 2025 24 अक्टूबर (शुक्रवार) को मनाई जाएगी। इस दिन कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि रहेगी, जो सुबह 11:15 बजे से अगले दिन 9:45 बजे तक रहेगी।
2) धनतेरस 2025 का शुभ मुहूर्त क्या है?
Ans- धनतेरस 2025 पर संध्या प्रदोष काल का समय सबसे शुभ रहेगा। पूजा और दीपदान का शुभ मुहूर्त शाम 6:46 बजे से रात 8:22 बजे तक रहेगा।
3) धनतेरस के दिन क्या खरीदना सबसे शुभ माना जाता है?
Ans- इस दिन सोना, चांदी, तांबे के बर्तन, सिक्के और नए वस्त्र खरीदना शुभ माना जाता है। इससे घर में धन स्थिरता और समृद्धि आती है।
4) धनतेरस पर दीपक जलाने का सही समय क्या है?
Ans- दीपदान का सर्वोत्तम समय संध्या 6:46 बजे से 8:22 बजे तक (प्रदोष काल) है। इस दौरान दीपक जलाने से घर में लक्ष्मी कृपा और सकारात्मक ऊर्जा आती है।
5) धनतेरस की पौराणिक कथा क्या है?
Ans- पौराणिक कथा के अनुसार, राजा हेमचंद्र के पुत्र की मृत्यु दीपक की रोशनी से टल गई, जिससे दीपदान की परंपरा शुरू हुई।
इसी दिन भगवान धन्वंतरि भी समुद्र मंथन से अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे।
6) धनतेरस पर क्या नहीं खरीदना चाहिए?
Ans- इस दिन काले रंग की वस्तुएं, लोहे के बर्तन, तेज धार वाले औज़ार और टूटे कांच की चीजें नहीं खरीदनी चाहिए, क्योंकि ये दुर्भाग्य का प्रतीक मानी जाती हैं।
7) धनतेरस 2025 पर कौन से मंत्र का जाप शुभ रहता है?
Ans-
मां लक्ष्मी मंत्र: “ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्री लक्ष्म्यै नमः॥”
भगवान धन्वंतरि मंत्र: “ॐ नमो भगवते धन्वंतरये अमृतकलश हस्ताय नमः॥”
इन मंत्रों का जाप समृद्धि और स्वास्थ्य दोनों प्रदान करता है।
8) धनतेरस के दिन घर की सजावट कैसे करें?
Ans- मुख्य द्वार पर तोरण और स्वस्तिक बनाएं, आम के पत्ते और दीपक लगाएं, तथा रंगोली में लक्ष्मी के पदचिह्न बनाएं। यह देवी लक्ष्मी का स्वागत करने का पारंपरिक तरीका है।
9) धनतेरस का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व क्या है?
Ans- धनतेरस का अर्थ है — “धन की तेरस”, यानी धन और स्वास्थ्य की प्राप्ति का दिन।
यह पर्व हमें सिखाता है कि सच्चा धन केवल संपत्ति नहीं, बल्कि अच्छा स्वास्थ्य, शांत मन और अच्छे कर्मों में छिपा है।
10) धनतेरस 2025 पर धन-संपत्ति बढ़ाने के कौन से उपाय करें?
Ans-
तुलसी के पास दीपक जलाएं – यह घर में समृद्धि लाता है।
कुबेर मंत्र का जाप करें – व्यापार और आर्थिक वृद्धि में सहायक।
रसोई और तिजोरी के पास दीपक रखें – यह धन की स्थिरता बढ़ाता है।
गरीबों को दान करें – यह शुभ फल और सौभाग्य देता है।
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