गुरुग्राम पुलिस साइबर ठगी: दुबई कनेक्शन सहित 9 ठगों पर बड़ी कार्रवाई

गुरुग्राम पुलिस साइबर ठगी

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गुरुग्राम पुलिस साइबर ठगी के मामलों पर लगातार कड़ी निगरानी रखते हुए एक बार फिर बड़ी सफलता हासिल करने में कामयाब रही है। निवेश और ऑनलाइन गेमिंग के नाम पर लोगों को ठगने वाले एक अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए पुलिस ने राजस्थान के कोटा से नौ साइबर ठगों को गिरफ्तार किया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इस पूरे नेटवर्क के तार सीधे दुबई में बैठे साइबर अपराधियों से जुड़े हुए थे, जो भारत में मौजूद अपने सहयोगियों को डिजिटल माध्यम से निर्देश दे रहे थे।

यह कार्रवाई साफ तौर पर दिखाती है कि गुरुग्राम पुलिस साइबर ठगी से जुड़े मामलों को लेकर अब जांच केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रही, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन तक गहराई से पहुंच रही है। यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति से हुई ठगी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ऑनलाइन निवेश फ्रॉड, व्हाट्सएप फ्रॉड, ऑनलाइन गेमिंग स्कैम और डिजिटल ठगी नेटवर्क जैसी तेजी से बढ़ती समस्याओं को उजागर करता है।

डिजिटल सुविधाओं के साथ-साथ सतर्कता अब हर नागरिक की जिम्मेदारी बन चुकी है।

कैसे काम करता था यह अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह

पुलिस की विस्तृत जांच में यह साफ हुआ कि यह अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह बेहद सुनियोजित और प्रोफेशनल तरीके से काम कर रहा था। गुरुग्राम पुलिस साइबर ठगी जांच के अनुसार, सबसे पहले लोगों को व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ा जाता था। इन ग्रुप्स में खुद को स्टॉक मार्केट एक्सपर्ट, निवेश सलाहकार या ऑनलाइन गेमिंग स्पेशलिस्ट बताने वाले लोग सक्रिय रहते थे।

ग्रुप्स में रोजाना फर्जी स्क्रीनशॉट, नकली प्रॉफिट रिपोर्ट, झूठे कस्टमर रिव्यू और गारंटीड रिटर्न के दावे साझा किए जाते थे। इससे आम लोगों का भरोसा धीरे-धीरे जीत लिया जाता था। जैसे ही कोई व्यक्ति निवेश करता, उसे फर्जी लिंक, नकली ट्रेडिंग डैशबोर्ड और लगातार मैसेज के जरिए और पैसा डालने के लिए उकसाया जाता था।

जांच में यह भी सामने आया कि पूरा सिस्टम इस तरह बनाया गया था कि पीड़ित को लंबे समय तक ठगी का एहसास ही न हो।

जहां मुनाफा असामान्य लगे, वहां सावधानी ही सबसे बड़ी सुरक्षा है।

15 दिसंबर 2024 की शिकायत से खुली ठगी की पूरी परत

इस पूरे गुरुग्राम पुलिस साइबर ठगी मामले की शुरुआत 15 दिसंबर 2024 को हुई, जब एक व्यक्ति ने थाना साइबर अपराध पश्चिम, गुरुग्राम में शिकायत दर्ज कराई। शिकायतकर्ता के अनुसार, उसे व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से स्टॉक ट्रेडिंग में निवेश कर मोटा मुनाफा कमाने का लालच दिया गया था।

शुरुआत में उससे थोड़ी रकम निवेश करवाई गई और नकली मुनाफा दिखाकर उसका भरोसा मजबूत किया गया। इसके बाद फर्जी लिंक और चैट के जरिए उससे धीरे-धीरे लाखों रुपये ट्रांसफर करवा लिए गए। जब न तो पैसा वापस मिला और न ही किसी प्रकार की प्रतिक्रिया मिली, तब उसे ठगी का एहसास हुआ।

शिकायत के आधार पर संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई, जो आगे चलकर पूरे गिरोह तक पहुंचने का कारण बनी।

समय पर की गई एक शिकायत कई जिंदगियों की कमाई बचा सकती है।

तकनीकी जांच और राजस्थान के कोटा में बड़ी पुलिस कार्रवाई

शिकायत मिलने के बाद गुरुग्राम पुलिस साइबर ठगी की साइबर अपराध पश्चिम टीम ने गहन तकनीकी जांच शुरू की। बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, आईपी एड्रेस और डिजिटल ट्रांजैक्शन ट्रैकिंग के जरिए जांच को आगे बढ़ाया गया।

तकनीकी जांच और सूचना संकलन के बाद, सहायक पुलिस आयुक्त प्रियान्शु दिवान के नेतृत्व में इंस्पेक्टर संदीप कुमार और उनकी टीम ने बीते बुधवार राजस्थान के कोटा में दबिश दी। इस कार्रवाई के दौरान खाता उपलब्ध कराने वाले आरोपितों सहित कुल नौ साइबर ठगों को गिरफ्तार किया गया।

यह कार्रवाई साबित करती है कि गुरुग्राम पुलिस साइबर ठगी से जुड़े मामलों में अब तकनीक सबसे बड़ा हथियार बन चुकी है।

जो तकनीक ठगी के लिए इस्तेमाल होती है, वही अपराधियों को पकड़ने का जरिया भी बनती है।

गुरुग्राम में साइबर ठगी ही नहीं, बल्कि अन्य संगठित अपराधों पर भी पुलिस लगातार सख्त कार्रवाई कर रही है। इससे पहले भी Gurugram Crime News के तहत सामने आए कार पार्ट्स चोरी के मामलों में पुलिस ने त्वरित जांच करते हुए कई आरोपियों की गिरफ्तारी कर अपराधियों पर शिकंजा कसा था।

बरामदगी ने खोली साइबर ठगी नेटवर्क की असली तस्वीर

गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से बड़ी मात्रा में डिजिटल और बैंकिंग उपकरण बरामद किए, जिससे इस पूरे साइबर ठगी नेटवर्क की गंभीरता सामने आई।

बरामद सामग्री में शामिल हैं:

  • 13 मोबाइल फोन
  • 3 लैपटॉप
  • 1 टैबलेट
  • 37 एटीएम कार्ड

गुरुग्राम पुलिस साइबर ठगी जांच के अनुसार, इन सभी उपकरणों का इस्तेमाल फर्जी बैंक खातों, मनी ट्रांसफर और ऑनलाइन फ्रॉड के लिए किया जाता था। अलग-अलग खातों में पैसा मंगवाकर उसे तुरंत निकाल लिया जाता था, ताकि जांच एजेंसियों के लिए ट्रेस करना मुश्किल हो जाए।

इतनी बड़ी बरामदगी यह साफ करती है कि अपराध पूरी तरह संगठित था।

किराए के फ्लैट से चल रहा था पूरा साइबर ठगी रैकेट

पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ कि आरोपी कोटा में किराए के फ्लैट से पूरा साइबर ठगी रैकेट चला रहे थे। वहीं से वे व्हाट्सएप ग्रुप, ऑनलाइन कसीनो और गेमिंग लिंक के जरिए लोगों को जोड़ते थे और चैट के माध्यम से उनसे रकम ट्रांसफर कराते थे।

यह तरीका आज के कई ऑनलाइन फ्रॉड मामलों में तेजी से अपनाया जा रहा है, जहां नेटवर्क को जानबूझकर जटिल बनाया जाता है।

ठगी का ठिकाना अस्थायी हो सकता है, लेकिन कानून की पकड़ स्थायी रहती है।

दुबई कनेक्शन और अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध का खुलासा

पूछताछ के दौरान अनिल बैरागी और संस्कार उर्फ प्रांशु ने कबूल किया कि वे सीधे दुबई में बैठे साइबर ठगों के संपर्क में थे। वहीं से पूरे नेटवर्क को निर्देश मिलते थे।

दुबई में बैठे मास्टरमाइंड्स डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए निर्देश देते थे, जबकि भारत में मौजूद आरोपी जमीनी स्तर पर काम संभालते थे। यह मामला साफ दिखाता है कि गुरुग्राम पुलिस साइबर ठगी से जुड़े अपराध अब केवल स्थानीय नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय चुनौती बन चुके हैं।

साइबर अपराध की सीमाएं नहीं होतीं, लेकिन कानून की पहुंच लगातार बढ़ रही है।

गिरफ्तार आरोपियों की पूरी सूची

गुरुग्राम पुलिस साइबर ठगी

इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों में शामिल हैं:

  • कोटा: लेखराज, मनीष, अनिल बैरागी, सोनू, दीपक, हिमांशु
  • बारा: मनीष मीणा
  • मध्य प्रदेश (रीवा): संस्कार उर्फ प्रांशु
  • इंदौर: गगन पटेल

हर गिरफ्तारी साइबर अपराध के खिलाफ एक मजबूत संदेश है।

आम नागरिकों के लिए पुलिस की अहम सलाह

गुरुग्राम पुलिस साइबर ठगी के बढ़ते मामलों को देखते हुए आम नागरिकों से अपील करती है कि वे:

  • अनजान व्हाट्सएप ग्रुप से दूरी बनाए रखें
  • गारंटीड रिटर्न वाले निवेश से बचें
  • किसी भी फर्जी लिंक पर क्लिक न करें
  • संदेह होने पर तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें

सतर्कता ही डिजिटल दुनिया की सबसे बड़ी सुरक्षा है।

गुरुग्राम पुलिस साइबर ठगी के बढ़ते मामलों को देखते हुए आम नागरिकों से अपील करती है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की स्थिति में बिना देरी किए भारत सरकार के आधिकारिक साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें, ताकि समय रहते उचित कार्रवाई की जा सके।

निष्कर्ष: साइबर ठगी के खिलाफ गुरुग्राम पुलिस की सख्त और निर्णायक कार्रवाई

यह पूरा मामला स्पष्ट रूप से साबित करता है कि गुरुग्राम पुलिस साइबर ठगी के मामलों को लेकर पूरी गंभीरता, सतर्कता और तकनीकी दक्षता के साथ कार्रवाई कर रही है। निवेश और ऑनलाइन गेमिंग के नाम पर लोगों को ठगने वाले इस अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश न सिर्फ एक बड़ी पुलिस सफलता है, बल्कि यह आम नागरिकों के लिए एक अहम चेतावनी भी है।

इस केस में दुबई से जुड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध नेटवर्क, फर्जी व्हाट्सएप ग्रुप, नकली निवेश लिंक, और फर्जी बैंक खातों का खुलासा हुआ है, जो दिखाता है कि आज के समय में साइबर ठगी कितनी संगठित और खतरनाक हो चुकी है। ऐसे में गुरुग्राम पुलिस द्वारा समय पर की गई कार्रवाई ने कई और लोगों को ठगी का शिकार बनने से बचाया है।

यह कार्रवाई साइबर अपराधियों के लिए एक साफ संदेश है कि अब डिजिटल ठगी करके बच निकलना आसान नहीं होगा, चाहे अपराधी देश में हों या विदेश में। वहीं आम नागरिकों के लिए यह सीख है कि गारंटीड रिटर्न, अनजान निवेश ऑफर और फर्जी ऑनलाइन गेमिंग लिंक से हमेशा सावधान रहना चाहिए।

जागरूक नागरिक और सतर्क पुलिस—यही साइबर ठगी के खिलाफ सबसे मजबूत सुरक्षा कवच है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ): गुरुग्राम पुलिस साइबर ठगी मामले से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न

FAQ 1: गुरुग्राम पुलिस साइबर ठगी का यह मामला कैसे सामने आया?

यह मामला 15 दिसंबर 2024 को दर्ज एक शिकायत के बाद सामने आया। पीड़ित ने थाना साइबर अपराध पश्चिम, गुरुग्राम में बताया कि उसे व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से स्टॉक ट्रेडिंग और ऑनलाइन निवेश में मोटा मुनाफा कमाने का लालच दिया गया था। शुरुआती जांच के बाद तकनीकी सबूतों और बैंक ट्रांजैक्शन के आधार पर गुरुग्राम पुलिस साइबर ठगी से जुड़े पूरे नेटवर्क तक पहुंच पाई।

FAQ 2: इस साइबर ठगी गिरोह में कितने आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं और वे कहां के रहने वाले हैं?

इस मामले में कुल नौ साइबर ठगों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार आरोपियों में राजस्थान के कोटा और बारा, मध्य प्रदेश के रीवा और इंदौर के रहने वाले लोग शामिल हैं। जांच में सामने आया कि ये आरोपी भारत में रहकर काम कर रहे थे, जबकि गिरोह का संचालन दुबई में बैठे साइबर अपराधियों के निर्देश पर किया जा रहा था।

FAQ 3: साइबर ठग लोगों को ठगने के लिए कौन-कौन से तरीके अपनाते थे?

जांच में पाया गया कि ठग व्हाट्सएप ग्रुप, फर्जी निवेश लिंक, नकली ट्रेडिंग डैशबोर्ड, और ऑनलाइन कसीनो व गेमिंग लिंक का इस्तेमाल करते थे। पहले लोगों का भरोसा जीतने के लिए नकली मुनाफा दिखाया जाता था और फिर धीरे-धीरे बड़ी रकम निवेश करवाकर संपर्क तोड़ दिया जाता था। यही तरीका इस गुरुग्राम पुलिस साइबर ठगी मामले में भी अपनाया गया।

FAQ 4: इस साइबर ठगी मामले में पुलिस ने क्या-क्या सामान बरामद किया?

गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 13 मोबाइल फोन, 3 लैपटॉप, 1 टैबलेट और 37 एटीएम कार्ड बरामद किए। इनका इस्तेमाल फर्जी बैंक खातों के जरिए मनी ट्रांसफर और ऑनलाइन फ्रॉड के लिए किया जाता था। यह बरामदगी इस बात का संकेत है कि साइबर ठगी का नेटवर्क काफी संगठित और बड़ा था।

FAQ 5: आम नागरिक गुरुग्राम पुलिस साइबर ठगी जैसे मामलों से खुद को कैसे सुरक्षित रख सकते हैं?

आम नागरिकों को चाहिए कि वे अनजान व्हाट्सएप ग्रुप से दूरी बनाए रखें, गारंटीड रिटर्न वाले निवेश ऑफर पर भरोसा न करें और किसी भी फर्जी लिंक पर क्लिक करने से बचें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की स्थिति में तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज करनी चाहिए। सतर्कता और जागरूकता ही साइबर ठगी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।

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